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Arresting Rules Latest 2022

Arresting Rules -Police cannot arrest you arbitrarily, you have these legal rights

Arresting rules in Law- According to lawyers, the police have to follow the entire legal process to arrest the accused even in criminal cases. Illegal arrest is not only a violation of the CrPC, but also against the fundamental rights enshrined in Articles 20, 21 and 22 of the Indian Constitution.

The job of the police is to maintain law and order in any area. She also works for crime control. However, from time to time, questions also arise about the functioning of the police. In many cases, it has been seen that the police arrested a person by ignoring the rules.

Later, the police is criticized for this or action is ordered from the court, but by then the victim has unnecessarily suffered many kinds of punishment. Today we are telling you such rights mentioned in the law, through which you can avoid the arbitrary action of the police.

Arresting

It is necessary for the police to follow these guidelines

Arresting rules -Legal experts and lawyers say that the police cannot arrest anyone arbitrarily. He has to follow the entire legal process for the arrest of the accused even in criminal cases.

Illegal arrest is not only a violation of the CrPC, but also against the fundamental rights enshrined in Articles 20, 21 and 22 of the Indian Constitution. The lawyers also gave some guidelines regarding the arrest.

If the police has gone to arrest a person, then the police officer who has arrested him must be in police uniform and his name should also be clearly written in his name plate.

Section 57 of the CrPC states that the police cannot keep any person in custody for more than 24 hours. He will have to take permission from the magistrate under section 56 of CrPC for the detention of more than this.

Arresting rules –Section 50(1) of the CrPC states that the police shall also inform the arrested person the reason for his arrest.

Arresting rules -Section-41B of CrPC states that it is necessary to prepare an arrest memo before arrest. It should contain the rank of the police officer making the arrest, the timing of the arrest and the signature of the eyewitness. Apart from this, the sign of the person who has been arrested should also be in that memo.

Section 50(A) of CrPC empowers the arrested person to inform his family or relative about his arrest. If that person does not know about this rule, then the police themselves will have to give this information to their family members.

Section 41D of CrPC gives the arrested person the right to meet his lawyer at any time during the police investigation. Not only this, under this he can also talk to his family.

Arresting rules -Section 54 of CrPC entitles a person to undergo medical examination after arrest. That is, if he demands it, then the police will have to get his medical done. By doing this, it will be beneficial that at the time of arrest you will get information about your physical condition, illness etc.

Suppose you are completely fit and there is no injury on the body, then the police cannot beat you up. This will put him in danger of being trapped. Whereas without medical police can beat you up in the name of interrogation and can prove that this injury was already done.

The law says that the arrested person should undergo a medical examination every 48 hours.

Arresting
Hindi Translation

Arresting Rules: पुलिस नहीं कर सकती आपको मनमाने तरीके से गिरफ्तार, आपके पास हैं ये कानूनी अधिकार

Law: वकीलों के मुताबिक, पुलिस को आपराधिक मामलों में भी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है. गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तारी न सिर्फ सीआरपीसी का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21और 22 में बताए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है.

What is Arresting Rules in Law: पुलिस का काम किसी भी एरिया में लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखना है. वह क्राइम कंट्रोल के लिए भी काम करती है. हालांकि समय-समय पर पुलिस की कार्य़प्रणाली पर भी सवाल उठते रहते हैं. कई मामलों में देखा गया है कि पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर किसी शख्स कि गिरफ्तारी की.

बाद में इसे लेकर पुलिस की आलोचना होती है या फिर कोर्ट की तरफ से कार्रवाई के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन तब तक पीड़ित बेवजह कई तरह की सजा भुगत चुका होता है. आज हम बता रहे हैं कानून में बताए ऐसे अधिकार जिनके जरिये आप पुलिस की मनमानी कार्रवाई से बच सकते हैं.

पुलिस के लिए इन गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी

कानूनी जानकार और वकील कहते हैं कि पुलिस किसी को अपने मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकती. उसे आपराधिक मामलों में भी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है.

गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तारी न सिर्फ सीआरपीसी का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21और 22 में बताए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है. वकीलों ने गिरफ्तारी को लेकर कुछ गाइडलाइंस भी बताईं.

अगर पुलिस किसी शख्स को गिरफ्तार करने गई है तो उसे गिऱफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को पुलिस की वर्दी में होना जरूरी है साथ ही उसकी नेम प्लेट में उसका नाम भी साफ-साफ लिखा हो.

सीआरपीसी की धारा 57 कहती है कि पुलिस किसी भी शख्स को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती है. उसे इससे ज्यादा के हिरासत के लिए सीआरपीसी की धारा 56 के तहत मैजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी.

सीआरपीसी की धारा 50 (1) कहती है कि पुलिस को गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उसकी अरेस्टिंग का कारण भी बताना होगा.

सीआरपीसी की धारा-41बी में बताया गया है कि गिरफ्तारी से पहले अरेस्ट मेमो तैयार करना जरूरी है. इसमें अरेस्टिंग करने वाले पुलिस अफसर की रैंक, अरेस्टिंग की टाइमिंग और प्रत्यक्षदर्शी के हस्ताक्षर होने चाहिएं. इसके अलावा जिसकी गिरफ्तारी की गई है उसके साइन भी उस मेमो में होने चाहिए.

सीआरपीसी की धारा 50(A) अरेस्ट किए गए व्यक्ति को ये अधिकार देती है कि वह अपनी गिरफ्तारी की जानकारी अपने परिवार या रिश्तेदार को दे सके. अगर उस शख्स को इस नियम का पता नहीं है तो पुलिस को खुद यह सूचना उसके घर वालों को देनी होगी.

सीआरपीसी की धारा 41D गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस जांच के दौरान कभी भी अपने वकील से मिलने का अधिकार देती है. यही नहीं इसके तहत वह अपने परिवार से भी बात कर सकता है.  

सीआरपीसी की धारा 54 गिरफ्तारी के बाद उस शख्स को मेडिकल जांच कराने का हक देती है. यानी अगर वह इसकी डिमांड करता है तो पुलिस को उसका मेडिकल कराना होगा. ऐसा कराने से ये फायदा होगा कि गिरफ्तारी के वक्त आपकी शारीरिक हालत, बीमारी आदि की जानकारी मिल जाएगी.

मान लीजिए आप पूरी तरह फिट हैं और शऱीर पर कोई चोट भी नहीं है तो पुलिस आपके साथ मारपीट नहीं कर सकती. इससे उसके फंसने का खतरा रहेगा. जबकि बिना मेडिकल पुलिस आपके साथ पूछताछ के नाम पर मारपीट कर सकती है और यह साबित कर सकती है कि ये चोट पहले से लगी थी.

कानून कहता है कि अरेस्ट किए गए शख्स की हर 48 घंटे में मेडिकल जांच होती रहे.

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